बस शनासाइयों का रहा है भरम,
है हक़ीक़त यही ज़िन्दगी है वहम।
हर दफ़ा बस यही सोचती मैं रही,
कू ब कू क्यूँ भला आँख होती है नम।
हर तरफ़ घूम कर आ गए आप तक,
ख़ुद ब ख़ुद रुक गए तब हमारे क़दम।
शाद चेहरा निगाहों में फिर आ गया,
देख ली जब कभी याद की एल्बम।
तौलता है मुझे रोज़ नज़रों से क्यूँ,
ये जमाना हुआ है बड़ा बेरहम।
आपको पा लिया यूँ लगा है मुझे,
दोगुनी हो गई प्रेम की हर रकम।
मैं रहूँ या नहीं चाहती हूँ यही,
रश्मियाँ साथ हों हर क़दम पर सनम।
©®रश्मि ममगाईं
शनासाई – जान पहचान, परिचय
कू ब कू – हर जगह,
शाद – ख़ुश, सुखी

