October 28, 2026

काव्य / कला संस्कृति

वक़्त के पाँव में बाँधकर रस्सियाँ, हम पकड़ते रहे ख़्वाब की तितलियाँ। क़ीमतें खो रहीं रोज़ अच्छाइयाँ,...
बस शनासाइयों का रहा है भरम, है हक़ीक़त यही ज़िन्दगी है वहम। हर दफ़ा बस यही सोचती...
हक़ीक़त से आंखें चुराने लगे हैं। नए रोज़ क़िस्से सुनाने लगे हैं। अदावत के बीजों को दिल...
ज़िन्दगी पर जोर कुछ चलता नहीं, पर समय भी एक सा रहता नहीं। नफ़रतों के दौर में...
लौटती यादों से कह दो लौटती यादों से कह दो, अब रुलाना छोड़ दो। चाहतों के इस...
उत्तराखंड का गुणगान जय बद्री धाम, जय केदार धाम, जय गंगोत्री धाम, जय यमुनोत्री धाम….. ये हैं...