October 27, 2026

2 thoughts on “वक़्त के पाँव में बाँधकर रस्सियाँ, हम पकड़ते रहे ख़्वाब की तितलियाँ”

  1. यह कविता हमें बताती है कि इंसान हमेशा भागते हुए समय को रोककर अपने खूबसूरत सपनों को सच करने की जद्दोजहद में लगा रहता है। इस सफर में उसे एक ऐसे समाज का सामना करना पड़ता है जहाँ अच्छाइयों की कद्र कम होती है और लोग गलतियों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं, यहाँ तक कि सीधे-सादे और शरीफ इंसान का मज़ाक उड़ाने से भी नहीं चूकते। लेकिन इन सामाजिक कड़वाहटों और दिनभर के संघर्षों के बीच, अपनों का निश्छल प्रेम और रात का सुकून एक माँ की थपकी बनकर सारी थकान मिटा देता है। भले ही नई उम्मीदों के दीप जलाने पर कभी-कभी निराशा की बस्तियाँ जलती हुई दिखती हैं, फिर भी इंसान को हार नहीं माननी चाहिए। अंत में, यह कविता जीवन के हर उतार-चढ़ाव को स्वीकार करते हुए, मन में हमेशा सकारात्मकता, अटूट हौसले और नई उम्मीद की किरणों को जगाए रखने का एक सशक्त संदेश देती है।

  2. बहुत सुंदर रचना रश्मि जी हार्दिक शुभकामनाएं

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