उसने जबसे यादों के पहलू में आना छोड़ दिया,
आँखों ने बातें करना, लब ने मुस्काना छोड़ दिया।
अब तो केवल एक बहाना है ये जीवन जीना भी,
हमने तो इस जीवन का हर ताना बाना छोड़ दिया।
हम तो यारी में कर बैठे थे दिल की कुछ बात कभी,
उसने दिल पर ले ली बातें आना जाना छोड़ दिया।
जबसे दौर हुआ है दुनिया में मोबाइल का यारों,
तबसे घर के लोगों ने घर में बतियाना छोड़ दिया।
रश्मि कहाँ मिलते हैं जग में अपनेपन से लोग सभी,
अब तो अपनों ने भी अपनों को अपनाना छोड़ दिया।
©®@श्रीमती रश्मि ममगाईं, ग़ज़लकारा, उत्तराखंड


बहुत ही सुंदर पंक्तियां
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