बस शनासाइयों का रहा है भरम, है हक़ीक़त यही ज़िन्दगी है वहम। हर दफ़ा बस यही सोचती...
काव्य / कला संस्कृति
हक़ीक़त से आंखें चुराने लगे हैं। नए रोज़ क़िस्से सुनाने लगे हैं। अदावत के बीजों को दिल...
‘ माँ ‘ कंपकपाते डगमगाते, जब भी चलता था तू। बांहें फैलाये थाम लेती थी मैं। नींद...
कौन दे दिल को सज़ा ये ज़ुल्म ढाने के लिए पास उसके कितनी बातें हैं बनाने के...
ज़िन्दगी पर जोर कुछ चलता नहीं, पर समय भी एक सा रहता नहीं। नफ़रतों के दौर में...
लौटती यादों से कह दो लौटती यादों से कह दो, अब रुलाना छोड़ दो। चाहतों के इस...
शाम ढल रही है आ रही है शाम, श्यामल प्रीति की चादर लिए, लौट आए श्रांत पंछी,...
उत्तराखंड का गुणगान जय बद्री धाम, जय केदार धाम, जय गंगोत्री धाम, जय यमुनोत्री धाम….. ये हैं...
क्या लिखूँ पाप में पुण्य की हिस्सेदारी लिखूँ, गंगा तेरे देश में प्यास की लाचारी लिखूँ। कोई...
कर्म संजीवनी बगत यु ,बगत थै दोहराणु रैंद, फिर बिसरंयु बाटु पर लाणुं रैंद । बीज जु...
