आधार छंद – मत्तगयंद सवैया मोहन मोहक माधव नाम यही मन को अति ही बहलाते। केशव माधव...
काव्य / कला संस्कृति
बीजे सक्या क्वी नि ब्वलदु बीज खुणे कि तू जमि जा। वु अपरी सक्या ल कबि कांडु,कबि...
*गर्मिन बिगाड़ी काम* ( व्यंग्यात्मक ) सैडा गौं मा खूब रौला मच्यूं ईं गर्मि बल फगणू कू...
उसने जबसे यादों के पहलू में आना छोड़ दिया, आँखों ने बातें करना, लब ने मुस्काना छोड़...
