आधार छंद – मत्तगयंद सवैया
मोहन मोहक माधव नाम यही मन को अति ही बहलाते।
केशव माधव सुंदर कुंडल, प्रीतम कानन में झलकाते।।
दर्शन दो तुम आज मुझे कह गोपिन,श्री दिन रैन दिखाते।
मोहन हाँसत देखत गोपिन, पार खड़े प्रिय नैन झुकाते।।
मूरत सूरत प्रेम समागम,रूप सुवासित प्रीत सुहाते।
मोहक गायन गाकर माधव मंगल नायक श्री जन भाते।।
मंदिर-मंदिर श्याम विराजित वंदन श्री पग पावन पाते।।
प्रेम सुधारस है जग में शुभ मंगल गायन श्रीधर गाते।।
संत सुजान कहे शुभदायक गोपिन श्रेष्ठ रखें शुचि नाते।
मोहित होकर मोहक नैनन संगत भाव सुजान सजाते।।
पावन कीर्ति पुनीत प्रसिद्ध , ज्योति सुभाषित दीप जलाते।
माधव-मोहन मंगलकारी, नेह सुधारस श्री बरसाते ।।
कविता बिष्ट ‘नेह’
कवयित्री, उत्तराखंड
