
सपनों में सजा लूंगा तुमको
शेर बना जज्बातों को,
मैं गज़ल बना लूंगा तुमको,
नैनो के निलय बसा करके,
सपनों में सजा लूंगा तुमको।
हैं दिवा सुखद और रम्य रैन,
जबसे तुमको पाया मैंने,
है बदल रहा तुमसे नसीब,
सौभाग्य बना लूंगा तुमको।
हे चाँद तेरी उजियारी से,
घर आँगन मेरा महकेगा,
बन चकोर टकटकी लगा,
क्षणदा में सदा दूंगा तुमको।
जीवन है, इसकी राहों में,
कुछ दर्द भी हैं, आँसू भी हैं,
जख्मों से भी राहत होगी,
जो दवा बना लूंगा तुमको।
©®नरेश चन्द्र उनियाल,
देहरादून, उत्तराखण्ड
